पतंजलि योगपीठ के अध्यक्ष Acharya Balkrishna के 39 अनमोल विचार

By | February 27, 2020

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पंतजलि योगपीठ के अध्यक्ष Acharya Balkrishna के 39 अनमोल विचार

पंतजलि योगपीठ के अध्यक्ष Acharya Balkrishna के 39 अनमोल विचार

Acharya Balkrishna के अनमोल विचार

1. असंयम की राह चलने से आनंद की मंजिल नहीं मिलती।

2. सफलता की खुशी मनाने से अधिक महत्वपूर्ण असफलता से सीख लेना है।

3. सदैव अपनी छोटी छोटी गलती से बचने की कोशिश करें क्योंकि मनुष्य पहाड़ों से नहीं अभी तो छोटे-छोटे पत्थरों से ठोकर खाता है।

4. जहां आदर ना हो, वहां जाने से आयु की हानि होती है।

5. हिंदी हमारी “मातृ” भाषा है “मात्र” नहीं।

6. आप जो स्वयं का आकलन करते हैं; सफलता उसी का साकार रूप है।

7. अंग्रेजी सीखिए, पढ़िए और बोलिए लेकिन हिंदी के प्रयोग में शर्म नहीं गर्व महसूस कीजिए।

8. लोभ कभी समाप्त न होने वाला रोग है।

9. शिक्षकों की श्रेणी में हमारे माता-पिता का स्थान सर्वोपरि है। यह कभी नहीं भूले।

10. जीवन ना तो अतीत में है और ना ही भविष्य में है। जीवन तो वर्तमान में है।

11. प्रभात काल में सुंदर बेला में,

 जाओगे कहां? इस जग मेला में।

 “कृष्ण” बैठे रहो अपने ही निड में,

 अंयथा खो जाओगे इस भीड़ में।

12. मनुष्य की सबसे बड़ी विजय, अपनी दुर्बलताओं पर विजय पाना है।

13. यदि कोई युवा मातृभूमि की सेवा नहीं करता तो उसका जीवन व्यर्थ है।

14. आत्मविश्वास मनुष्य का सबसे बड़ा मित्र है।

15. गुरु ही ज्ञान के स्रोत है। सच्चा शिष्य वही है जो गुरु के लिए ज्ञान को कभी विस्मृत ना करें।

16. मनुष्य की अकड़ तथा घमंड उसके मुर्ख होने की निशानी है, ताकतवर होने की नहीं।

17. पिता एक ऐसा शब्द है जिसके बिना हमारे जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। पिता हमारी शक्ति और संबल है, अतः उनके सम्मान को केवल 1 दिन में बांधना अनुचित होगा। उनके लिए हम प्रतिदिन प्रतिक्षण कृतज्ञ रहे।

 अनमोल विचार Hindi

18. जिसके पास उम्मीद है,वही कभी हारकर भी नहीं हारता।

19. अपनी सबसे बड़ी कमजोरी से सामना होने के बाद ही अपनी सबसे बड़ी ताकत का ज्ञान होता है।

20. तीन वस्तुएं जाने के बाद कभी वापस नहीं आती है, समय, शब्द तथा अवसर।

21. नशीले पदार्थों के सेवन से तन,मन, धन, धर्म व आत्मा की हानि और अपनी तथा परिवार की बदनामी होती है।

22. जिस प्रकार दीपक का प्रकाश उसका परिचय देता है, उसी प्रकार मनुष्य के कर्म उसका परिचय देता हैं।

23. क्रोध अकेला आता है परंतु हमारी सारी अच्छाई साथ लेकर जाता है। अतः क्रोध पर नियंत्रण रखना चाहिए।

24. कोई भी कार्य जिसे आप आज और अभी कर सकते हैं, कल पर ना टालें।

25. सृष्टि में मां की ममता ही प्रेम का आरंभ और अंत है।

26. जीवन मे अधिक रिश्ते होना आवश्यक नही है अपितु रिश्तो मे जीवन होना आवश्यक है।।

27. “आहार ही औषधि है।” हमे यह संदेश दुनिया भर मे पहुंचना है।

28. चिंता के समान हमारे शरीर का नाश करने वाला और कुछ नही है।

29. दुनिया भर मे जवान बने रहने के लिए अनुसंधान हो रहे हैं।किंतु जवानी गोलियो-वाटियो मे नही,प्राकृतिक आहार मे है। उसकी गुणवत्ता बनाए रखे।

30. संभावनाओं की कोई सीमा नहीं होती।

Acharya Balkrishna motivational thought

31. अन्न की जगह पर कैप्सूल खाने की सोच बहुत खतरनाक सोच है। हमें सृष्टि की प्राकृतिक प्रक्रियाओं को तोड़ने का प्रयास नहीं करना चाहिए।

32. उत्तम है बैठकर “पत्तल पर भोजन करना”।

33. पहले हम अन्न  को औषधि मानते थे लेकिन अब हम फूड सप्लीमेंट्स पर आ गए हैं। यानी दुनिया में दवाई को अन्न बनाने की उल्टी प्रक्रिया चल रही है।

34. नारी, यह सिर्फ शब्द नहीं अपितु एक ऐसा सम्मान है जिसे देवत्व प्राप्त है।

35. हमारे समय का कठोर सत्य है कि आज भोजन खा कर पेट भरता है, परंतु भोजन खाकर बीमारी भी फैलती है।

36. सम्मान विरासत में नहीं मिलता,कमाना पड़ता है।

37. अपनी परंपराओं, मूल्यों और आदर्शों में रहकर भी हम उत्पादों को बेचने -खरीदने का कार्य कर सकते हैं ।इसका एक उदाहरण पतंजलि आयुर्वेद है।

38. हमारा देश कृषि प्रधान देश है, खाद्य प्रसंस्करण की सही नीतियों को अपनाकर हम अपनी आमदनी को 10 गुना बढ़ा सकते हैं।

39. यह सारा ब्रह्मांड प्रभु तेरी हस्ती;

उसमें छोटी सी मेरी बस्ती,

पर यह अजब है,

तुझे मेरा पता है; 

पर मैं तुझ को ढूंढ रहा हूं।

यह पतंजलि योगपीठ के अध्यक्ष आचार्य बालकृष्ण (Acharya Balkrishna) के अनमोल विचार आपको केसे लगे वो हमें कमेन्ट में जरुर बताइए धन्यवाद.

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